Sunday, October 30, 2011


प्रणाम तुम्हें करता हूं मां,जन्म दिया,इंसान बनाया
अपनी छाती से चिपकाकर मुझको अमृतपान कराया
छुटपन के दिन याद आते हैं,कितना कष्ट उठाया तुमने
मैंने लाख रुलाया,फिर भी तुमने मां भरपूर हंसाया
जीवन की हर सांसों पर मां तेरा ही है नाम लिक्खा
तुमको उपमा क्या दूं मैं मां, तुझमें है भगवान समाया
कुंवर प्रीतम


4 comments:

संजय कुमार चौरसिया said...

maa ko shat shat naman

संगीता पुरी said...

बहुत बढिया ..

प्रेम सरोवर said...

आपका पोस्ट अच्छा लगा । मेर नए पोस्ट "अपनी पीढ़ी को शब्द देना मामूली बात नही है " पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

NISHA MAHARANA said...

bhut achcha.

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