Sunday, September 2, 2012


लो आ गयी है फिर से रूत प्रेम की सुहानी
इस रूत में तुम मिलो तो बने इक नयी कहानी
बादल बरस रहे और मौसम है महका-महका
शायद ये मांगता है कोई प्रेम की निशानी

-कुंवर प्रीतम
2-9-12

1 comment:

Madan Mohan Saxena said...

बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

http://madan-saxena.blogspot.in/
http://mmsaxena.blogspot.in/
http://madanmohansaxena.blogspot.in/

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...