Wednesday, June 11, 2014

दरिया रहा कश्ती रही लेकिन सफर तन्हा रहा.....



दरिया रहा कश्ती रही लेकिन सफर तन्हा रहा
हम भी वहीं तुम भी वहीं झगड़ा मगर चलता रहा

साहिल मिला मंजिल मिली खुशियां मनीं लेकिन अलग
खामोश हम खामोश तुम फिर भी बड़ा जलसा रहा

सोचा तो था हमने, न आयेंगे फरेबे इश्क में
बेइश्क दिल जब तक रहा इस अक्ल पर परदा रहा

शिकवे हुए दिल भी दुखा दूरी हुई दोनों में पर
हर बात में हो जिक्र उसका ये बड़ा चस्का रहा

छाया नशा जब इश्क का 'चर्चित' हुए कु्छ इस कदर
गर ख्वाब में उनसे मिले तो शहर भर चर्चा रहा

- विशाल चर्चित

5 comments:

Unknown said...

शुरुआत जोरदार थी फिर तो ....

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) said...

कल 16/जून/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद !

Unknown said...

बढ़िया।बधाई

Unknown said...

बढ़िया।बधाई

Pratibha Verma said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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