Wednesday, August 20, 2014

बादलों का अट्टहास
वहाँ दूर आसमान में
और मूसलाधार बारिश
उस पर तुम्हारा मुझसे मिलना
मन को पुलकित कर रहा है
मैं तुम्हारी दी
लाल बनारसी साड़ी में
प्रेम पहन रही हूँ
कोमल, मखमली
तुम्हारी गूँजती आवाज
सा प्रेम
बाँधा  है पैरों में
जिसकी आवाज़
तुम्हारी आवाज सी मधुर है
मैं चल रही हूँ प्रेम में
तुमसे मिलने को
अब ये बारिश भी
मुझे रोक ना पाएगी ।

© दीप्ति शर्मा

6 comments:

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना शनिवार 23 अगस्त 2014 को लिंक की जाएगी........
http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) said...

बहुत ही बढ़िया


सादर

Unknown said...

बेहतरीन

Unknown said...

बेहतरीन

सु-मन (Suman Kapoor) said...

बहुत बढ़िया

Unknown said...

बहुत सुंदर.

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