Sunday, August 14, 2011

क्यों?


                                                     
इन हौसलों में आके 
भी आँखों में नमी क्यों? 
राहें चल रही हैं पर 
मंजिल की चाह में
है जमीं थमी क्यों?
है आँखों में नमीं क्यों?

अपनों के साथ भी
हूँ मैं अब हरदम 
फिर भी न जाने क्यों?
है किसी की कमी क्यों? 
हैं आँखों में नमी क्यों? 

- दीप्ति शर्मा
www.deepti09sharma.blogspot.com

3 comments:

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) said...

क्यूँ का जवाब बहुत कठिन है ।
बहुत ही बढ़िया कविता।

सादर

Unknown said...

Har sawal ka jawab nahi mil sakta...
Bahut achi rachna Deepti ji..

संजय भास्‍कर said...

beautiful post....
excellent write!

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