Monday, August 8, 2011

तुम्हीं बताओ धरती खातिर दिल बादल का कब तरसा है


मत कहना मुझको कि बादल आज शहर में फिर बरसा है
मत कहना मुझको प्रीतम का आज नहाकर दिल हरसा है
सुखी धरती तेज तपिश में, रोती-गाती रही महीनों
तुम्हीं बताओ धरती खातिर दिल बादल का कब तरसा है
कुंवर प्रीतम

2 comments:

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

Sach kaha aapne Preetam ji.. Dharti ke liye Badal ka dil kabhi nahi tarsa hai..
Bahut sundar rachna..al ka dil kabhi nahi tarsa hai..
Bahut sundar rachna..

दीप्ति शर्मा said...

ek dam sahi kaha aapne

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