Monday, August 8, 2011

कैसे कैसे मंजर साथी देखे हैं इन आंखों ने


कैसे कैसे मंजर साथी देखे हैं इन आंखों ने
सुख की तरस रही,लेकिन दुःख जीभर देखे आंखों ने
पल दो पल की खातिर कोई मन-आंगन में बैठ गया तो
तन्हा अगले पल ही हमको देखा है इन आंखों ने
कुंवर प्रीतम

3 comments:

दीप्ति शर्मा said...

ye aankhe hi to hame sab raah dikhati hai
waah behtreen

Minakshi Pant said...

बहुत खूबसूरत सच कहा तुमने आँखे ही तो राह दिखाती हैं |

संजय भास्कर said...

बहुत खूबसूरत

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