Sunday, August 21, 2011

उम्मीद


एक उम्मीद है लगी,
एक किरण है दिखी,
नये कोंपल है लगे,
नवल कलियाँ है खिली ।
पतझड़ के बाद,
शायद आये ऋतुराज,
ह्रदय में शतत,
एक आशा है जगी ।
युवा शक्ति आज,
है उठ खड़ा हुआ,
आलोक की तलाश,
अब शुरु हो चुकी ।
बदलाव की आये बयार,
रिमझिम-सी हो फुहार,
सुखद एक परिवर्तन की,
विश्वास है जगी ;
राष्ट्र नवनिर्माण की,
एक उम्मीद है लगी ।


7 comments:

हरकीरत ' हीर' said...

इस तरह की उम्मीदें जगती रहनी चाहिए चिराग जी ....

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

धन्यवाद हरकीरत जी |

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

धन्यवाद हरकीरत जी |

कविता रावत said...

umeed par duniya kaayam hai..
bahut badiya ummedbhari rachna..
Haardik shubhkamnayen!

संजय कुमार चौरसिया said...

बहुत सुन्दर

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

Dhanyawaad Kavita..

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

Dhanyawaad Sanjay ji..

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