Wednesday, August 24, 2011

इक तारा


मैं इक तारा हूँ और 
टूटकर बिखर गया हूँ |
कभी चमका करता था ,
हँसता था आसमां मे ,
आज किसी की ख़ुशी के लिए 
अपना वजूद खोकर 
जमीं पर उतर गया हूँ ,
टूटकर बिखर गया हूँ |


दे दिया है सब कुछ 
पर मिला तो कुछ नही है ,
उसकी तमन्ना पूरी करने ,
आसमां से गिर गया हूँ ,
टूटकर बिखर गया हूँ |


जब देखा था उसने 
कुछ उम्मीद लिए मुझे ,
आंसू जो बह रहे थे उसके 
उन आंसुओ की खातिर 
मैं जमीं से मिल गया हूँ |
टूटकर बिखर गया हूँ |

-दीप्ति शर्मा 
www.deepti09shrarma.blogspot.com

1 comment:

Apanatva said...

choo gaee dil ko aapkee kavita .

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...